r/Hindi • • Mar 03 '26

स्वरचित Wrote this poem in khadi boli (spoken in Western UP )

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मुझे पता है आप लोग कहेंगे कि इसमें वर्तनी की गलतियाँ हैं, लेकिन मैंने शब्दों को वैसे ही लिखा है जैसे हम यहाँ उच्चारण करते हैं। Eg - वह "देखीं" होता है पर हम यहा बड़ी "ई" नहीं खिचते सिर्फ छोटी "इ" इसतेमाल करते है पर लिखते आम हिंदी की तरह लिखते है ।


r/Hindi • • Apr 05 '26

...अर थे पीटो ताळ्यां / मोनिका गौड़

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मजमा पसंद
थे लोग ई हो
जका राम रै साथै होवण रो भरम पाळो
राम रै वनगमन में
सीता रो साथ जायज ठहरावता थकां ई
सोनलिया हिरण रै आखेट सारू
बणाओ सीता नैं ई दोसी
हरण में
लिछमण-रेख उलांघण रै आरोप री
लुकी-छुपी आंगळ्यां ई सीता कानी करता
राम रो दुख मोटो देखो हो
सत्य, पवित्रता रा आंदोलनकारियां
जुध में संघार रो दोस
सीता रै माथै धरता थकां
उकसावो अगन-पारखा सारू
थे ईज हो बै भीड़ री भेड़ां
जकी गरभवती लुगाई नैं
घर सूं कढवाओ
हाका हूक सूं
छद्म न्याव रो ढोंग रचवा’र
दिखावो
राम नैं बापड़ो
धिन्न है थांरी दोरंगी सोच, चिंतना
कै सीता रै निरवासन नैं जायज बतावता
उणरै जमीन में समाईज्यां पछै
स्त्री रै स्वाभिमान री बात करो
बजाओ ताळ्यां
बळी लेय’र निरदोस री
पोमीजो
आपरै दोस नैं सतीत्व रै महिमा-मंडण सूं
ढांपणै री कोसिस करता
रचो सती महिमा रा गीत
थरपो उणनैं देवी
थांरी मजमैबाजी सीता, द्रौपदी सूं लेय’र
आज तांई बा ईज है
हर बार थांरी जबान री वेदी पर
हुवती आई है स्त्री री चारित्रिक, शारीरिक हत्या
अर थे पीटो ताळ्यां?
कदी न्याय रै नांव, कदी धरम रै नांव
कदी मूल्यां रै लेखै,
लेवता रैवो भख
बेकसूर लुगाईजात रो...?


r/Hindi • • 6m ago

विनती Tum Se Hi vs Codependency

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Will Irshad Kamil’s Sufi lyrics to the famous Bollywood tune Tum Se Hi hold up against the probes of modern psychology?


r/Hindi • • 8h ago

स्वरचित Wrote two pieces inspired by Ghalib [OC]

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The first one:

Ke jise chadh jaaye Ghalib, uske liye paani bhi sharaab hai,

Jise na chade to sharaab bhi kabaab hai.

Ke ae sharaab, tu cheez badi kharaab sahi,

Magar is mukammal jahan mein khushi ki jagah tu hi hai.

Here's the other one:

Lahu bahaana seekh lo Ghalib,

Ke ae zamaana bada zaalim hai.

Narm-dili ka yahan koi daam nahi,

Yahan sharafat hi sabse bada gunah hai.


r/Hindi • • 5h ago

स्वरचित किसको पता चलता है?

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समंदर का रोना भी, किसको पता चलता है? भीड़ में चीख़ती आवाज़ों का, किसको पता चलता है?

इस मुजरिम को ज़ुल्म की तालीम किसने दी थी, इन हवाओं में पल रहे तूफ़ानों का, किसको पता चलता है?

बरबाद हैं मगर ख़ुद को बरबाद भी नहीं कर सकते, मेरे न होने से, अब भी किसी को, पता चलता है।

किसी के किए गुनाहों का, ख़ामियाज़ा सबको भुगतना पड़ा तुम्हारी ग़फ़लत का नतीजा, सबको पता चलता है।

कुछ पुण्य करने से इनके सारे पाप ढक जाएँगे, इनके पाप का घड़ा भरना, किसको पता चलता है?


r/Hindi • • 13h ago

स्वरचित Just tried to express my हाल-ए-दिल in my own words.

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r/Hindi • • 10h ago

स्वरचित महर्षि वाल्मीकि। रत्नाकर से रामायण के रचनाकार तक का सफर।

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क्या हमारे पापों का बोझ उठाने के लिए कोई और तैयार है? स्वयं के कर्मों के प्रति हमारी उत्तरदायित्वता की एक कालजयी कथा।

बीहड़ के सन्नाटे में उसकी हिंसक आँखें शिकार की तलाश में थीं... पर रत्नाकर को क्या मालूम था कि आज उसका सामना किसी राहगीर से नहीं, बल्कि स्वयं उसकी अपनी नियति से होने वाला था।

बोहनी की आस में टकटकी लगाए, जंगल के सन्नाटे को चीरती एक जोड़ी हिंसक आँखें बरगद की ओट से रास्ते को निहार रही थीं। वह डाकू रत्नाकर था, जिसके आतंक ने इस बीहड़ के रास्तों को सूना कर दिया था।

कई दिन बीत गए थे, कई सूरज ढल चुके थे, पर उसकी कुल्हाड़ी को कोई शिकार प्राप्त नहीं हुआ था। घर में भूख से बिलखते बच्चे, बूढ़े माता-पिता और सूली पर टंगे आत्मसम्मान का बोझ उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। आज अगर वह खाली हाथ लौटा, तो अपनों की तीखी निगाहों का सामना कैसे करेगा? इसी उधेड़बुन में उसका हाथ गंडासे पर कस जाता है।

तभी विंध्य के उस शांत जंगल में एक अनूठा स्वर गूँजता है। कोई महात्मा बिना किसी भय के, नारायण के नाम में मगन, वीणा की तान छेड़ते हुए चले आ रहे थे, जिनके चेहरे का तेज इस बात का प्रमाण था कि वे संसार के सारे बंधनों से मुक्त हैं।

रत्नाकर ने एक पल को सोचा—इस संन्यासी को लूटकर क्या मिलेगा? दो समय की रोटी का प्रबंध भी न हो सकेगा। पर तभी भूखे बच्चों की पुकार उसकी अंतरात्मा पर भारी पड़ जाती है। वह गंडासा लहराते हुए सीधे महात्मा के सामने कूद पड़ता है।

हैरानी की बात थी कि सामने साक्षात् काल को देखकर भी महात्मा के चेहरे से मुस्कान विलुप्त नहीं हुई। उनकी आँखों में डर की जगह एक असीम करुणा थी। रत्नाकर ने गंडासे की धार उनकी गर्दन पर टिकाते हुए कड़ककर कहा, "ऐ संन्यासी! रुक जा। तेरे पास जो भी मूल्यवान है, तुरंत मेरे हवाले कर, वरना जीवन का अंत समझ!"

महात्मा ने शांत भाव से अपनी वीणा को छुआ और बड़ी सहजता से पूछा, "पुत्र, ठहरो! पहले मुझे यह तो समझाओ कि आखिर मूल्यवान क्या है? तुम किस वस्तु को अनमोल समझते हो?"

रत्नाकर झल्लाकर बोला, "मूर्ख मत बन! सोना, चांदी, हीरा और बहुमूल्य रत्न... ऐसी हर वो चीज़ जिसका मोल संसार में सबसे अधिक हो, वही मूल्यवान है।"

महात्मा मुस्कुराए, और कहा, "लेकिन यह मोल तय कौन करता है?”

“यह सब तो संसार ने पहले से ही तय कर रखा है।” रत्नाकर ने उत्तर दिया।

“आज जिसे तुम स्वर्ण कह रहे हो, भूख से मरते इंसान के लिए उसकी कीमत एक सूखी रोटी के टुकड़े से भी कम हो जाती है। यह मूल्य वस्तु में नहीं, तुम्हारी चाहत में है।” महात्मा ने सहजता से कहा।

“सोना, चांदी और रत्नों आदि से ही तो जनमानस को प्रसन्नता मिलती है। आनंद मिलता है।” रत्नाकर ने बिना झिझके कहा।

“क्या इन सबसे तुम्हें सच में प्रसन्नता मिलती है?” महात्मा ने पुनः पूछा।

“क्यों नहीं। जिसमें मेरा परिवार प्रसन्न, उसी में मेरी भी प्रसन्नता है।” रत्नाकर ने दृढ़ स्वर में कहा।

“और तुम्हारी व्यक्तिगत प्रसन्नता का क्या?” महात्मा अपने प्रश्न पर अडिग रहे।

“अपने परिवार का पोषण करना ही तो मेरा कर्तव्य है।” रत्नाकर अब असमंजस में था।

“तुम जिसे कर्तव्य समझकर यह क्रूरता कर रहे हो, क्या कभी उस सत्य को भी टटोला है कि इस भयंकर पाप की आग में तुम्हारा परिवार भी तुम्हारे साथ जलेगा? क्या वे तुम्हारे इस कर्मफल के साझीदार बनेंगे?"

रत्नाकर ने सीना तानकर कहा, "क्यों नहीं! मैं यह अधर्म उन्हीं के पेट की खातिर तो कर रहा हूँ। वे मेरे सुख-दुख और पाप-पुण्य, सब में मेरे साझीदार हैं।"

महात्मा ने मंद मुस्कान के साथ कहा, "तो फिर विलंब कैसा? एक बार घर जाकर अपनी गृहस्थी से यह सवाल पूछ आओ।”

“जाकर पूछ आऊं! ताकि तुम यहाँ से भाग जाओ?” रत्नाकर के मुख पर एक कुटिल मुस्कान थी।

“मैं वचन देता हूँ, तुम्हारे लौटने तक मैं इसी वृक्ष के नीचे तुम्हारी प्रतीक्षा करूँगा। मैं यहाँ से भागूँगा नहीं।"

“मैं कैसे तुम पर विश्वास करूं?” रत्नाकर ने असहमति से सिर हिलाया।

“तुम्हें लगता है कि मुझे तुम्हारा या मृत्यु का लैशमात्र भी भय है? अगर ऐसा होता तो मैं कब का तुम्हारे चरणों में गिर कर अपने प्राणों की भिक्षा मांग रहा होता।”

महात्मा के अडिग विश्वास ने रत्नाकर को भीतर तक झकझोर दिया। वहाँ रुकना अब उसे कष्टकर प्रतीत हुआ।

वह भागता हुआ अपने घर पहुँचा। लेकिन वहाँ जो सच उसका इंतजार कर रहा था, उसने उसके पैरों तले की जमीन खिसका दी।

माता-पिता और पत्नी ने दो टूक कह दिया, "तुम्हारा धर्म हमारा भरण-पोषण करना है, लेकिन उसके लिए पाप का मार्ग चुनना केवल तुम्हारा निर्णय था। कर्मफल का यह काँटा तुम्हें अकेले ही भोगना होगा।"

इस एक कड़वे सत्य ने रत्नाकर के भीतर के पाशविक अहंकार को हमेशा के लिए भस्म कर दिया। वह बदहवास हालत में वापस जंगल की ओर दौड़ा। वहाँ उन महात्मा की वीणा से फूटते सुरों ने पूरे वन को एक दैवीय शांति में डुबो दिया था।

रत्नाकर का गंडासा कहीं पीछे छूट चुका था।

वह रोता हुआ महात्मा के चरणों में ढह गया और बोला, "ऋषिवर, संसार में मेरा कोई नहीं है। कोई मेरे पापों का बोझ उठाने को तैयार नहीं। मुझे इस घोर नरक से तारिए।"

पूरी कहानी यहाँ है:

https://www.facebook.com/share/p/1PhsFkRwTn/


r/Hindi • • 1d ago

देवनागरी I tried reading Jaun Elia

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r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित शाम - OC

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r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित नहीं समझोगे निष्ठुर शहर

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r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित Tasveer

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r/Hindi • • 1d ago

स्वरचित Khair Choro..

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r/Hindi • • 2d ago

स्वरचित ज़रूरतों के आड़े ख़्वाहिशों का आना, ख़्वाहिशों के आड़े ज़रूरतों का आना, अब अच्छा नहीं लगता, ये मजबूरी के आगे मजबूरी का आना।ख़राब वक़्त में सबका जाना, एक वक़्त बाद फिर लौट आना, इन पतझड़ों के बाद, अब मंज़ूर नहीं, बहारों का आना।

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r/Hindi • • 2d ago

स्वरचित 'कौन-सा दौर' - Which period?

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r/Hindi • • 2d ago

स्वरचित देखो राम

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r/Hindi • • 3d ago

देवनागरी Dinkar ji On Caste ✨

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From Rashmirathi

...ऊँच-नीच का भेद न माने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,

दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।

...तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,

पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।


r/Hindi • • 3d ago

स्वरचित कुछ लम्हे-A few moments

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r/Hindi • • 3d ago

साहित्यिक रचना प्रादुर्भाव- भीष्म साहनी

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कृपया इस लघु कथा की e-copy पाने में मदद करें ।
अब तक ये पता कर पाया हूँ की ये ICSE की क्लास 6 की हिंदी पाठ्यक्रम की किताब अनुगूँज में उपलब्ध है ।


r/Hindi • • 3d ago

स्वरचित हिंदी में पोस्टर बनाने वालों से एक सवाल — आप सबसे ज़्यादा किस तरह के टेम्पलेट इस्तेमाल करते हैं?

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We launched Hindi support for our poster design app 🇮🇳

I’m the founder and developer of PosterKaaran.

We originally started as a Tamil-first poster design app, mainly for festival posters, business promotions, invitations, political/event creatives and local social-media designs.

After seeing the response from Tamil users, we started expanding to other Indian languages.

PosterKaaran now supports:

• Tamil
• Telugu
• Malayalam
• Hindi

Hindi poster templates are now live, and users can create and edit posters directly in Hindi instead of depending only on English-first design tools.

We’re still building and adding more Hindi templates and categories.

🌐 Web: https://posterkaaran.com
📱 Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.tamilpostermaker.posterkaaran

Would love feedback from Hindi-speaking users/designers here:

What kind of templates do you usually need the most?

Festival posters, business offers, invitations, political creatives, social-media posts, or something else?


r/Hindi • • 4d ago

साहित्यिक रचना उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा - इब्न-ए-इंशा

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r/Hindi • • 4d ago

स्वरचित राम

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r/Hindi • • 4d ago

स्वरचित दिल में प्यार है या नहीं, ये जानने के लिए दिल तोड़ते तो नहीं।

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r/Hindi • • 5d ago

विनती What are some regional and foreign accents in Hindi and how do they sound?

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as an english speaker I've been curious about this, I don't fully understand Hindi but I can read and write (so if you comment on the post please answer my questions in English with explanations using Devanagari characters!)

so my question is what are some of the regional accents that exist in Hindi and how do they differ from the standard textbook version? like for example in English we have Scottish, irish, Australian, various British and American dialects where we can understand each other but have some different words and large variety of pronunciations.. does this same type of thing exist for native speakers of Hindi?

and also what are some of the differences, mistakes, or quirks that people make when they speak Hindi as a second language? for example if a Bengali or a tamil person speaks in Hindi, what are some of the typical features of their accent? and if you've heard a native English speaker talking in Hindi as a second language, what type of things would they say differently?


r/Hindi • • 4d ago

विनती मन की बात

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प्रिय मित्रगण,

इस समूह में अनेकों बातों पर विचार-विमर्ष होती रहती है। परंतु केवल विचार करने मात्र से उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होती। इसलिए मेरा आप सभी से यह विनम्र निवेदन है कि यदि आप के मन में हिंदी भाषा से जुड़ी कोई ऐसी विचार उतपन्न हो जो आपके अनुसार हिंदी भाषा के अस्तित्व के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है तो आप उस बात को सीधे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से साँझा कर सकते हैं नमो ऐप पर। इस ऐप पर 'मन की बात' नामक मंच पर आप अपने विचार अवश्य रखें। मैंने भी कई बार अपनी बातों को इस मंच पर रखा है।


r/Hindi • • 5d ago

स्वरचित सदियाँ -Centuries (OC)

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